Shikha Bhoi
Class 8A
हार
कभी कभार हारना भी अच्छा है
क्योंकि हारना कोई लत नहीं होती।
जीत किसी की साथी नहीं होती।
क्या पता जो आज हारा हो
वो कल जीत जाए।
जो जीता हो
वो बस इतराता रह जाए।
सूरज उगता है,
उगेगा।
हार आई है
तो कभी ना कभी जाएगा।
सूरज की तरह चमकना होगा,
हार से निकलना होगा।